
कैंसर रोधी तत्व ग्लूकोराफेनिन से समृद्ध भारतीय सरसों
ग्लूकोराफेनिन, जो मुख्य रूप से ब्रोकोली में पाया जाने वाला एक मुख्य ग्लूकोसिनोलेट है, अपने
स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है। विशेष रूप से इसके विघटन उत्पाद, सल्फोराफेन, जिसमें कैंसर-रोधी, सूजन-रोधी, एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं और गठिया, अस्थमा और तंत्रिका संबंधी विकारों जैसी बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं। हालांकि, इन लाभों को प्राप्त करने के लिए ब्रोकोली का अधिक सेवन आवश्यक है, परंतु इसकी खेती में आनुवंशिक और पर्यावरणीय सीमाएँ हैं।
इस समस्या के समाधान के लिए, बीआरआईसी-एनआईपीजीआर के शोधकर्ताओं ने CRISPR/Cas9 तकनीक का उपयोग करके एल्केनाइल हाइड्रॉक्साल्काइल प्रोड्यूसिंग 2 ( AOP2 ) जीन परिवार के जीन को निष्क्रिय करके ट्रांसजीन-मुक्त भारतीय सरसों ( ब्रासिका जुनसिया ) की किस्में विकसित की हैं, जिससे माइक्रोग्रीन्स में उच्च मात्रा में ग्लूकोराफेनिन (75 पीपीएम तक) का संचय होता है । इन सरसों की किस्मों में हानिकारक ग्लूकोसिनोलेट्स की मात्रा भी कम है। ये कैंसर-रोधी और रोगनिरोधक गुणों से युक्त एक नई पीढ़ी के सुपरफूड के रूप में उभर सकती हैं। इनके विभिन्न भागों – अंकुर, माइक्रोग्रीन्स, पत्तियां, तेल और खली – का उपयोग मानव और पशु आहार के लिए तथा औद्योगिक पैमाने पर ग्लूकोराफेनिन-आधारित सप्लीमेंट्स और औषधियों के उत्पादन के लिए किया जा सकता है।