
संक्षिप्त विवरण: अमीनो एसिड बनाने वाली प्रक्रियाओं में अक्सर ‘फीडबैक इनहिबिशन लूप’ पाए जाते हैं, जो बनने वाले अंतिम उत्पादों के जमाव को सख्ती से नियंत्रित करते हैं। इन प्रक्रियाओं की बेहतर जानकारी मेटाबॉलिक नेटवर्क को समझने के लिए ज़रूरी है, यह जानकारी पौध प्रजनकों के लिए भी उपयोगी हो सकती है, ताकि वे ऐसी फसलें विकसित कर सकें जिनमें मनुष्यों के लिए आवश्यक अमीनो अम्ल अधिक मात्रा में उपलब्ध हों।
ल्यू (Leu) के जैवसंश्लेषण में, यह अच्छी तरह ज्ञात है कि अमीनो अम्ल का अंतिम उत्पाद, आइसोप्रोपाइलमैलेट सिंथेस (IPMS) एंजाइम के C-टर्मिनल रेगुलेटरी डोमेन से जुड़कर, उसकी गतिविधि को कम कर देता है। ब्रैसिकेसी (Brassicaceae) परिवार के पौधों में पहले किए गए प्रयोगशाला और संरचनात्मक अध्ययनों से पता चला है कि यदि पौधों के IPMS एंजाइम का C-टर्मिनल रेगुलेटरी डोमेन हटा दिया जाए, तो यह एंजाइम नई भूमिका अपनाकर सेकेंडरी मेटाबोलाइट (ग्लूकोसिनोलेट) बनाने वाले एंजाइमों, जैसे मिथाइलथियोएल्काइलमैलेट सिंथेस (MAMS), में बदल सकता है। इसके अलावा, बैक्टीरिया के विपरीत, पौधों में प्रयोगशाला अध्ययनों में पाया गया कि C-टर्मिनल रेगुलेटरी डोमेन हटाने के बाद भी IPMS एंजाइम सक्रिय बना रहता है और ल्यू (Leu) द्वारा होने वाला फ़ीडबैक अवरोध नहीं होता। हालांकि, IPMS के C-टर्मिनल डोमेन को हटाने पर जीवित जीवों में ल्यू (Leu पाथवे फ्लक्स पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसके बारे में हमें अभी भी बहुत कम जानकारी है। इस प्रश्न का अध्ययन करने से यह बेहतर और वास्तविक समझ मिल सकती है कि पौधों में ल्यू जैवसंश्लेषण को नियंत्रित करने वाली यह नियामक प्रणाली वास्तव में कैसे कार्य करती है।
जब हमने C-टर्मिनल नियामक डोमेन के बिना एडिटेड IPMS को अरेबिडोप्सिस और तिलहन फसल, भारतीय सरसों में डाला, तो हमें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि पूरे पौधे में ल्यू (Leu) संचय में कोई वृद्धि नहीं हुई। वास्तव में, ल्यू का स्तर कम हो गया, जबकि पाथवे के माध्यम से प्रवाह बढ़ गया। विस्तृत मेटाबोलोमिक और जैव-रासायनिक विश्लेषणों से पता चला कि ल्यूसिन (Leu) बनने की प्रक्रिया का एक मध्यवर्ती पदार्थ IPMS के लिए प्रतिस्पर्धात्मक अवरोधक की तरह काम करता है, जब उसके रेगुलेटरी डोमेन को हटा दिया जाता है। हमारे विस्तृत जैव रासायनिक विश्लेषण से पता चला कि C-टर्मिनल नियामक डोमेन की अनुपस्थिति में, ल्यू पाथवे का एक मध्यवर्ती (α-केटोइसोकेप्रोएट) सक्रिय स्थल के लिए मूल IPMS सब्सट्रेट (2-ऑक्सोइसोवैलेरेट) के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकता है। इस प्रकार, हमने पहली बार यह पाया कि IPMS का ल्यू-फीडबैक रेगुलेटरी डोमेन न केवल कोशिका में Leu की सांद्रता के अनुसार एंजाइम की गतिविधि को नियंत्रित करता है, बल्कि यह एक पाथवे इंटरमीडिएट द्वारा होने वाले प्रतिस्पर्धी अवरोध को भी बाईपास कर देता है—एक ऐसा अवरोध जो पाथवे के अंतिम उत्पाद को गंभीर रूप से सीमित कर सकता है। इन परिणामों से पौधों की एक महत्वपूर्ण प्राथमिक मेटाबोलिक प्रक्रिया के नियंत्रण को समझने में नई जानकारी मिली है। साथ ही, यह ल्यू (Leu) के संतुलन को नियंत्रित और बेहतर बनाने के लिए नए दृष्टिकोण के विकास की संभावना भी दिखाता है।
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