ब्रिक-राष्ट्रीय पादप जीनोम अनुसंधान संस्थान

बेहतर कल के लिए बीज बोना

ब्रिक-राष्ट्रीय पादप जीनोम अनुसंधान संस्थान

BRIC-National Institute of Plant Genome Research

निदेशक का प्रोफ़ाइल

प्रो. मनोज प्रसाद, एफएनए

निदेशक

बीआरआईसी-राष्ट्रीय पादप जीनोम अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली

प्रो. मनोज प्रसाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाने-माने प्लांट मॉलिक्यूलर बायोलॉजिस्ट हैं, जिनकी रिसर्च ने क्रॉप स्ट्रेस बायोलॉजी, प्लांट-वायरस इंटरैक्शन, फंक्शनल जीनोमिक्स और मॉलिक्यूलर ब्रीडिंग की समझ को काफी बेहतर बनाया है। ढाई दशक से भी ज़्यादा लंबे अपने वैज्ञानिक करियर में, उन्होंने बुनियादी वैज्ञानिक खोजों को व्यावहारिक अनुसंधान से जोड़ते हुए फसलों की सहनशीलता, उत्पादकता तथा पोषण सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के समाधान में उल्लेखनीय योगदान दिया है। प्रो. प्रसाद ने 1999 में कलकत्ता यूनिवर्सिटी से राइस बायोलॉजी में स्पेशलाइज़ेशन के साथ बॉटनी में पीएच.डी. की डिग्री प्राप्त की।  इसके बाद उन्होंने जर्मनी के गेटर्सलेबेन में इंस्टीट्यूट ऑफ़ प्लांट जेनेटिक्स एंड क्रॉप प्लांट रिसर्च में गेहूं, जौ और अनाज फसलों के जीनोमिक्स पर शोध किया। वहाँ उन्होंने पहले  अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट फेलो के तौर पर और बाद में रिसर्च साइंटिस्ट के रूप में कार्य किया। वर्ष 2004 में उन्होंने एनआईपीजीआर में कार्यभार ग्रहण किया और विभिन्न वरिष्ठ वैज्ञानिक पदों पर कार्य करते हुए स्टाफ साइंटिस्ट -VII के पद तक पहुँचे। बीआरआईसी-एनआईपीजीआर के निदेशक का दायित्व संभालने से पूर्व वे दिल्ली यूनिवर्सिटी, साउथ कैंपस, नई दिल्ली में जेनेटिक्स डिपार्टमेंट में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थे।

प्रो. प्रसाद इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी, नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंसेज, इंडिया और नेशनल एकेडमी ऑफ़ एग्रीकल्चरल साइंसेज के फेलो हैं। उन्हें कई बड़े सम्मान मिले हैं, जिनमें दो बार जेसी बोस नेशनल फेलोशिप मिला; INSA सिल्वर जुबली कमेमोरेशन मेडल; डीबीटी-टाटा इनोवेशन फेलोशिप; डीबीटी नेशनल बायोसाइंस अवॉर्ड; बीरबल साहनी मेडल; कम इस्तेमाल होने वाली फसलों में योगदान के लिए गोल्डन पीकॉक अवॉर्ड; और अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट फेलोशिप शामिल हैं।

उनकी रिसर्च में जेनेटिक्स, जीनोमिक्स, एपिजेनेटिक्स, स्मॉल आरएनए बायोलॉजी और फंक्शनल बायोटेक्नोलॉजी को शामिल किया गया है, जिसमें टमाटर और फॉक्सटेल मिलेट पर खास खास ध्यान दिया गया है।  उनके ग्रुप ने टमाटर लीफ कर्ल न्यू दिल्ली वायरस  के प्रति  पौधों की प्रतिरोधक क्षमता के मॉलिक्यूलर मैकेनिज्म को समझने में अहम योगदान दिया है, जिसमें miRNA-मीडिएटेड डिफेंस, ऑटोफैगी, आरएनए -डायरेक्टेड डीएनए मिथाइलेशन, यूबिक्विटिन-प्रोटियासोम पाथवे और होस्ट-ससेप्टिबिलिटी फैक्टर्स शामिल हैं। इन जानकारियों को मॉलिक्यूलर मार्कर, आर्टिफिशियल माइक्रोआरएनए, ट्रांसजेनिक तरीकों और जीनोम एडिटिंग का इस्तेमाल करके फसल सुधार की स्ट्रेटेजी में बदला गया है। प्रो. प्रसाद ने फॉक्सटेल मिलेट को फंक्शनल जीनोमिक्स और क्लाइमेट-रेसिलिएंस रिसर्च के लिए एक मॉडल सिस्टम के तौर पर स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाई है। उनके काम ने जीनोमिक और मार्कर रिसोर्स, ओपन-एक्सेस डेटाबेस, ट्रांसफॉर्मेशन प्लेटफॉर्म और एबायोटिक स्ट्रेस, नाइट्रोजन-यूज एफिशिएंसी, यील्ड और अनाज की न्यूट्रिशनल क्वालिटी से जुड़े कैंडिडेट जीन तैयार किए हैं। उनकी रिसर्च एक ऐसे मैकेनिज्म-टू-एप्लीकेशन कंटिन्युअम का उदाहरण है जिसमें बेसिक बायोलॉजिकल खोजों को फसल सुधारने के टूल्स और टेक्नोलॉजी में विकसित किया जाता है।

उन्होंने 230 से ज़्यादा वैज्ञानिक प्रकाशन लिखे हैं, जिनमें रिसर्च आर्टिकल, रिव्यू, किताबें, किताबों के चैप्टर और वैज्ञानिक दृष्टिकोण शामिल हैं। वे पेटेंट पर आधारित तीन इनोवेशन से जुड़े हैं – जिनमें दो स्वीकृत पेटेंट और एक प्रकाशित पेटेंट एप्लीकेशन शामिल है – जो टमाटर में वायरस से लड़ने की क्षमता और फॉक्सटेल मिलेट से मिली गर्मी सहने की तकनीक से संबंधित हैं। उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी विभाग, डीएसटी-एसईआरबी/एएनआरएफ, आईसीएआर और अंतरराष्ट्रीय सहयोग कार्यक्रमों से अच्छी-खासी कॉम्पिटिटिव रिसर्च फंडिंग प्राप्त की है।

रिसर्च के अलावा, प्रो. प्रसाद को इंस्टीट्यूशनल गवर्नेंस, रिसर्च एडमिनिस्ट्रेशन और नेशनल साइंस पॉलिसी का बहुत अनुभव है। उन्होंने डीबीटी, एएनआरएफ, सीएसआईआर, आईसीएआर और राष्ट्रीय विज्ञान अकादमियों की विशेषज्ञ समितियों और टास्क फोर्स में काम किया है। उनकी प्रशासनिक ज़िम्मेदारियों में इंस्टीट्यूशनल गवर्नेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, एथिक्स, फाइनेंस, एकेडमिक एडमिनिस्ट्रेशन और स्टूडेंट वेलफेयर शामिल हैं।

एक प्रतिबद्ध मार्गदर्शक के रूप में, उन्होंने कई डॉक्टोरल छात्रों और पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ताओं को प्रशिक्षित किया है जो अब विश्व स्तर पर स्वतंत्र वैज्ञानिक और शैक्षणिक पदों पर हैं। नेतृत्व के प्रति उनका दृष्टिकोण वैज्ञानिक ईमानदारी, सहानुभूति, खुली बातचीत, जवाबदेही और एक ऐसा माहौल बनाने पर  जोर देता है जिसमें युवा शोधकर्ता बड़े आइडियाज़ को आगे बढ़ा सकते हैं।

बीआरआईसी-एनआईपीजीआर के निदेशक के रूप में प्रो. मनोज प्रसाद अपने साथ गहन वैज्ञानिक विशेषज्ञता, व्यापक संस्थागत अनुभव तथा पादप जीनोम अनुसंधान को ऐसी उपयोगी प्रौद्योगिकियों में परिवर्तित करने की दृढ़ प्रतिबद्धता लेकर आए हैं, जो कृषि, समाज और देश की जैव-अर्थव्यवस्था  को सार्थक रूप से सुदृढ़ बनाने में योगदान दें।

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