
राइजोक्टोनिया सोलानी नामक एक नेक्रोट्रोफिक कवक रोगजनक के कारण होने वाला शीथ ब्लाइट रोग धान की वार्षिक उपज में 20% तक की हानि का कारण बनता है। हाल ही में हुए एक अध्ययन में, एनआईपीजीआर के वैज्ञानिकों ने एक रोग संवेदनशीलता कारक की पहचान की है, जिसे जीन संपादन द्वारा निष्क्रिय करने पर धान में शीथ ब्लाइट के प्रति उच्च सहनशीलता देखी गई। यह अध्ययन ‘द प्लांट सेल’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। बीआरआईसी-एनआईपीजीआर के शोधकर्ताओं ने एक नवीन संवेदनशीलता तंत्र का पता लगाया है, जिसमें रोगजनक मेजबान के OsNUOR जीन को सक्रिय करके फेरोप्टोसिस जैसी कोशिका मृत्यु को प्रेरित करता है और धान में नेक्रोटिक रोग के घाव उत्पन्न करता है। जीनोम संपादन के माध्यम से OsNUOR को निष्क्रिय करने से धान में रोग प्रतिरोधक क्षमता प्राप्त होती है। यह अध्ययन संवेदनशीलता कारक के जीनोम संपादन के माध्यम से शीथ ब्लाइट रोग प्रतिरोधी धान की किस्में विकसित करने का मार्ग प्रशस्त करता है। इसका सतत कृषि और वैश्विक खाद्य सुरक्षा की दिशा में दूरगामी प्रभाव है, क्योंकि शीथ ब्लाइट रोग विश्व स्तर पर धान की वार्षिक उपज में 20% तक की हानि का कारण बनता है। विस्तृत रिपोर्ट के लिए (
https://doi.org/10.1093/pcell/koag112 )