नागरिक चार्टर
राष्ट्रीय पादप जीनोम अनुसंधान संस्थान, (रा.पा.जी.अनु.सं.), भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग द्वारा वित्त पोषित एक स्वायत्त अनुसंधान संस्थान है। इस संस्थान की स्थापना वर्ष 1998 में पादप विज्ञान और कृषि जीव विज्ञान के मूलभूत और अनुप्रयुक्त क्षेत्रों में उच्च स्तरीय अनुसंधान करने और उसे बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। पोस्ट-जीनोमिक युग में कोशिकीय और प्रणालीगत दोनों स्तरों पर जैविक अनुसंधान में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। इस संदर्भ में, पादप जीनोमिक्स अनुसंधान पर विशेष ध्यान देने के कारण एनआईपीजीआर की स्थिति अद्वितीय है। अकादमिक-उद्योग अंतःक्रियाओं और ज्ञान आधारित संसाधनों के लिए अपने आधारभूत ढांचे के माध्यम से, एनआईपीजीआर पादप जीव विज्ञान के अग्रणी क्षेत्रों में योगदान देने के लिए तत्पर है। सभी जीव विज्ञान अनुसंधान जीनोमिक्स से प्रभावित हैं और परिणामस्वरूप पौधे के जीवन को समझने और आनुवंशिक संवर्धन द्वारा फसलों को तैयार करने के नए तरीके उभर रहे हैं। एनआईपीजीआर का लक्ष्य जीनोमिक्स अनुसंधान की वर्तमान गति से उत्पन्न इन आशाओं को साकार करने में योगदान देना है। एनआईपीजीआर में अनुसंधान कार्यक्रमों का उद्देश्य पादप जीनोम में जीन की संरचना, अभिव्यक्ति और कार्य को समझना है, और पादप जीन/जीनोम की इस समझ का उपयोग उच्च पैदावार और बेहतर गुणवत्ता के लिए फसलों में आनुवंशिक सुधार करने के लिए करना है।
दृष्टि
पादप जीव विज्ञान के क्षेत्र में नया ज्ञान उत्पन्न करना, उसे वर्तमान ज्ञान के साथ एकीकृत करना और सामाजिक लाभों के लिए पौधों के आनुवंशिक संवर्धन हेतु उसका उपयोग करना।
उद्देश्य
बुनियादी और अनुप्रयुक्त पादप आणविक जीवविज्ञान में उच्च स्तरीय अनुसंधान के लिए सहायता, बढ़ावा, मार्गदर्शन और समन्वय करना ।
अधिदेश
- फसल सुधार में व्यावहारिक अनुप्रयोग के उद्देश्य से, प्लांट जीनोमिक्स और मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के अग्रणी क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान का संचालन करना;
- आणविक जीव विज्ञान के दृष्टिकोणों के साथ-साथ ऊतक संवर्धन और जेनेटिक इंजीनियरिंग तकनीक का उपयोग करके महत्वपूर्ण जीनों की पहचान करना और उन्हें बेहतर करके उन्नत कृषि संबंधी गुणों और जैविक/अजैविक तनाव प्रतिरोध वाले ट्रांसजेनिक पौधे उत्पन्न करना;
- जीन रेगुलेशन, सिस्टम बायोलॉजी और मैपिंग से संबंधित किसी भी मूलभूत कार्य को करना जो उपरोक्त जनादेश को प्राप्त करने में सहायक हो;
- महत्वपूर्ण लक्षणों की निगरानी के लिए मॉलिक्यूलर मार्करों का विकास;
- ट्रांसजेनिक पौधों का उत्पादन और परीक्षण;
- रोगजनकों के अस्तित्व के लिए आवश्यक जीनों की पहचान करना और रोगजनकों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए उन्हें लक्षित करना;
- ज्ञान सृजन और नवाचार, जिसमें प्रकाशन और पेटेंट शामिल हैं;
- उन्नत प्रशिक्षण कार्यशालाओं, संगोष्ठियों, सेमिनारों और वैज्ञानिक विनिमय कार्यक्रमों के माध्यम से सभी स्तरों (पीएच.डी., पोस्ट-डॉक्टोरल शोधकर्ता, स्नातकोत्तर प्रशिक्षु और युवा वैज्ञानिक) पर मानव संसाधन विकास के लिए ज्ञान का प्रसार करना;
- प्लांट जेनेटिक इंजीनियरिंग और जीनोम विश्लेषण में उन्नत प्रशिक्षण मॉड्यूल प्रदान करना;
- पादप जीनोम अनुसंधान में संलग्न अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोगात्मक कार्यक्रम शुरू करना और उनके साथ घनिष्ठ संबंध विकसित करना;
गतिविधियां
अनुसंधान गतिविधियाँ
संस्थान की अनुसंधान गतिविधियाँ पादप जीवविज्ञान के अग्रणी क्षेत्रों जैसे कि कम्प्यूटेशनल जीवविज्ञान, जीनोम विश्लेषण और आणविक मानचित्रण, अजैविक तनाव प्रतिक्रियाओं के आणविक तंत्र, पोषण जीनोमिक्स, पादप विकास और संरचना, पादप प्रतिरक्षा, फसल सुधार के लिए ट्रांसजेनिक्स, आणविक प्रजनन और पादप जीनोमिक्स के अन्य उभरते क्षेत्रों में की जाती हैं, जिनमें शामिल हैं:
- फसल सुधार के लिए जीनोम सिक्वेंसिंग, विश्लेषण और मॉलिक्यूलर मैपिंग।
- अजैविक तनाव प्रतिक्रिया के मॉलिक्यूलर मैकेनिज्म को समझना।
- जैविक तनाव के प्रति बेहतर सहनशीलता वाले पौधे विकसित करने के लिए पादप-रोगजनक अंतःक्रिया के आणविक आधार को समझना।
- नए जीनों की खोज करना, उनकी संरचना और कार्य को समझना और पोषण गुणों में सुधार के लिए उनका उपयोग करना।
- पौधों के विकास और संरचना के विभिन्न पहलुओं का गहन विश्लेषण।
- जीन, प्रोटीन और जीनोम के संरचनात्मक और कार्यात्मक पहलुओं को स्पष्ट करने के लिए जैवसूचना विज्ञान संबंधी दृष्टिकोण विकसित करना।• जीन, प्रोटीन और जीनोम के संरचनात्मक और कार्यात्मक पहलुओं को स्पष्ट करने के लिए जैवसूचना विज्ञान संबंधी दृष्टिकोण विकसित करना।
- पादप जीवविज्ञान के उभरते क्षेत्रों में शोध करना।
पीएच.डी कार्यक्रम
संस्थान 2001 से पीएच.डी कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, जो जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से संबद्ध है। छात्र (जो सीएसआईआर / यूजीसी / डीबीटी / आईसीएमआर के जेआरएफ हैं) को इस कार्यक्रम में खुली प्रतियोगिता माध्यम से चयनित किया जाता है । चयनित शोध छात्रों को एक वर्ष की अवधि के लिए कोर्स वर्क करना पड़ता है, जो विभिन्न प्रयोगशालाओं में पादप बायोलॉजी के विभिन्न क्षेत्रों पर अनुसंधान कार्य द्वारा किया जाता है ।
प्रशिक्षण कार्यक्रम
स्नातकोत्तर उपाधि की आंशिक पूर्ति के लिए संस्थान के वैज्ञानिकों की देखरेख में परियोजना के काम को पूरा करने के लिए अन्य संस्थानों के स्नातकोत्तर कार्यक्रम में उत्कृष्ट छात्रों के लिए विकल्प उपलब्ध हैं । इसके अलावा, बैचलर डिग्री के छात्रों को प्लांट बायोटेक्नोलॉजी अनुसंधान से परिचित कराने और कक्षा व लैब के बीच के अंतर को कम करने के लिए, अल्पकालिक/ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षुओं हेतु अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा संस्थान में प्रशिक्षुओं के लिए सरकारी एजेंसियों जैसे केवीपीवाई, जेएनसीएआरआर, आईएनएसए / आईएएस / एनएसआई जैसे प्रायोजित कार्यक्रमों के माध्यम से भी विकल्प उपलब्ध हैं । इसके अतिरिक्त, पोस्ट-डॉक्टरेट स्तर पर अनुसंधान के अवसर भी संस्थागत फेलोशिप और डीबीटी, सीएसआईआर और एसईआर आदि जैसे अन्य सरकारी एजेंसियों के फैलोशिप के माध्यम से उपलब्ध हैं ।
मान्यता
संस्थान की प्रौद्योगिकियों, मानवीय मूल्यों, अखंडता और पारदर्शिता और इसकी सामाजिक जिम्मेदारी को कार्यान्वित करने में दृढ़ विश्वास है ।
हित धारकों / ग्राहकों:
- बायोटेक्नोलॉजी विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार
- सरकारी संस्थान, कॉलेज, विश्वविद्यालय और विभाग
- कृषि मंच और किसान संघ
- सार्वजनिक वित्त पोषित अनुसंधान एवं विकास संस्थान
- बायोटेक इंडस्ट्रीज, बीज कंपनियां, कृषि आधारित उद्योग
- छात्र और शोध छात्र
पूछताछ
निम्नलिखित समितियों / कार्यकर्ताओं को कर्मचारियों / छात्रों / जनता की शिकायतों को दूर करने के लिए रा.पा.जी.अनु.सं. में स्थापित किया गया है:
- लोक शिकायत निदेशक
- मुख्य सतर्कता अधिकारी
- लोक सूचना अधिकारी
- नोडल अधिकारी (एससी / एसटी)
- नोडल अधिकारी (ओबीसी)
- यौन उत्पीड़न के खिलाफ लिंग संवेदीकरण समिति (जीएससीएसएच)
- छात्र की परामर्श समिति
संस्थान से सभी संबंधित सूचनाओं का पूरा विवरण वेबसाइट के (www.nipgr.ac.in)इस लिंक के तहत दिया गया है: हमारे बारे में → समितियां → संस्थागत (आंतरिक) समितियां/नामित पदाधिकारी।
कार्यान्वयन के साधन
संस्थान सामान्य जनता और हितधारकों को सभी संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है । संस्थान की वेबसाइट पर अकादमिक और अनुसंधान गतिविधियां, निविदाएं, नौकरियों, बुनियादी ढांचा सुविधाओं, अधिकारियों / नोडल अधिकारी / समितियों आदि के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई गई है ।